Monday, 6 June 2011

हम जियेंगे या मरेंगे ...

मेरा  कर्मा  तू  मेरा  धर्मा  तू 

तेरा  सब  कुछ  मैं  मेरा  सब  कुछ  तू 

हर  करम  अपना  करेंगे   -2

ए  वतन  तेरे  लिए 

दिल  दिया  है  जान  भी  देंगे  ए  वतन  तेरे  लिए 

तू  मेरा  कर्मा  तू  मेरा  धर्मा  तू  मेरा  अभिमान  है 

ए  वतन  महबूब  मेरे  तुझपे  दिल  कुर्बान  है 

हम  जियेंगे  या  मरेंगे  ए  वतन  तेरे  लिए 

दिल  दिया  हैं  जान  भी  देंगे  ...

हिन्दू  मुस्लिम  सिख  ईसाई  हमवतन  हमनाम  हैं 

जो  करे  इनको  जुदा  मज़हब  नहीं  इल्जाम  है 

हम  जियेंगे  या  मरेंगे  ...

तेरी  गलियों  में  चलाकर  नफरतों  की  गोलिया 

लूटते  हैं  सब  लुटेरे  दुल्हनों  की  डोलियाँ 

लुट  रहा  है  आंप  वो  अपने  घरों  को  लूट  कर 

खेलते  हैं  बेखबर  अपने  लहू  से  होलियाँ 

हम  जियेंगे  या  मरेंगे  ...

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