Tuesday, 30 August 2011

सौ दर्द हैं . . .

सौ दर्द हैं सौ राहतें
सब मिला दिल नशीं
एक तू ही नहीं..


सौ दर्द है सौ राहतें
सब मिल दिल नशीं
एक तू ही नहीं ...


रुकी रुकी सी ये हवा
और सूखे पत्ते कि तरह
शहर कि सडकों पे मैं
लावारिस उड़ता हुआ
सौ रास्तें ... पर तेरी राह नहीं ...


सौ दर्द है सौ रास्ते
सब मिल दिल नशीं
एक तू ही नहीं ...


बहता है पानी
वक़्त को यूँही रहने दे
दरिया ने करवट ली है तो
साहिलों को सहने दे


सौ हसरतें पर तेरा घाम नहीं

तेरे बिन . .

तेरे बिन मैं यूं कैसे जिया कैसे जिया तेरे बिन
ले कर यादें तेरी रातें मेरी कटी
मुझसे बातें तेरी
करती है चांदनी
तनहा है तुझ बिन रातें मेरी
दिन मेरे दिन के जैसे नहीं
तनहा है बदन तनहा है रूह
ना मेरी आंखें रहे
आजा मेरे अब रूबरू जीना नहीं बिन तेरे


तेरे बिन मैं यूं कैसे जिया


कब से आँकें मेरी
राह में तेरी बिछी
कब से आँकें मिली
राह में तेरी bichee
भूल से भी कभी तू मिल जाये कहीं
भूले न मुझसे बातें तेरी भीगी हैं हर पल आँकें मेरी


क्यों साँसे लू क्यों मैं jiyun
जीना बुरा सा लगे
क्यों हो गया तू बेवफा मुझको ज़रा बता वजह


तेरे बिन मैं यूं कैसे जिया
कैसे जिया तेरे बिन
तेरे बिन मैं यूं कैसे जिया
कैसे जिया तेरे बिन
तेरे बिन तेरे बिन कैसे जिया

वादा करो . . . . .

वादा करो नही छोडोगी तुम मेरा साथ..

जहा तुम हो.. वहा मैं भी हूँ....

छुओ नही देखो जरा पीछे रखो हाथ..

जवां तुम हो, जवां मैं भी हूँ..





सुनो मेरी जां हसके मुझे ये कह दो

भीगें लबों की नर्मी मेरे लिए हैं

जवां नजर की मस्ती मेरे लिए हैं

हसीं अदा की शौखी मेरे लिए हैं

मेरे लिए ले के आई हो ये सौगात

जहा तुम हो, वहा मैं भी हूँ





मेरे ही पीछे आखिर पडे हो तुम क्यो

एक मैं जवां नही हूँ और भी तो हैं

मुझे ही घेरे आखिर खडे हो तुम क्यो

मैं ही यहा नही हूँ और भी तो हैं

जाओ जाके ले लो जो भी दे दे तुम्हे हाथ

जहा सब हैं, वहा मैं भी हूँ

जवां कई हैं, लेकीन जहां में कोई तुम सी हसीं नही हैं

हम क्या करें

तुम्हे मिलू मैं, इसका तुम्हे यकीं हैं, हमको यकीं नही हैं

हम क्या करें

ऐसे नही भूलो जरा देखो औकात

किसीका तो देना होगा दे दो मेरा साथ

जहा तुम हो, वहा मैं भी हूँ