Monday, 6 June 2011

जिस्म मिट जाने से कब हस्तियां मिटा करती है।

जिस्म मिट जाने से

कब हस्तियां मिटा करती है।

जज्बा रहे कायम तो

मंजिले भी मिला करती है।

घुट घुट कर जीने से अच्छा है

कि कुछ कर गुजर जाएं

देश की खातिर मरने वालो

की ही हस्ती रहा करती है।

मुर्दा सोच अभी तक लदी है,

तो ही ऐसे हुक्मरान चुना करती है।

उठो कि ललकारा है वक्त ने

इसीलिए मांए संतान जना करती है।


जय हिन्द.... जय भारत !!!!

जय युवा.... जय क्रांति !!!!

वन्देमातरम !!!!

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